जब याद का किस्सा खोलूं तो,
कुछ लोग बहुत याद आते है,
मैं गुज़रे पल को सोचु तो,
कुछ लोग बहुत याद आते है!
अब जाने कौन सी नगरी में,
आबाद है जाकर मुद्दत से,
मैं देर रात तक जागु तो,
कुछ लोग बहुत याद आते है!
कुछ बाते थी फूलों जैसी,
कुछ लहजे थे खुसबू जैसे,
मैं सारे चमन में टहलू तो,
कुछ लोग बहुत याद आते है!
वो पल भर की नाराजगियां,
और मान भी जाना पल भर में,
अब खुद से भी रूठू तो,
कुछ लोग बहुत याद आते है!!!
-अज्ञात
कुछ लोग बहुत याद आते है,
मैं गुज़रे पल को सोचु तो,
कुछ लोग बहुत याद आते है!
अब जाने कौन सी नगरी में,
आबाद है जाकर मुद्दत से,
मैं देर रात तक जागु तो,
कुछ लोग बहुत याद आते है!
कुछ बाते थी फूलों जैसी,
कुछ लहजे थे खुसबू जैसे,
मैं सारे चमन में टहलू तो,
कुछ लोग बहुत याद आते है!
वो पल भर की नाराजगियां,
और मान भी जाना पल भर में,
अब खुद से भी रूठू तो,
कुछ लोग बहुत याद आते है!!!
-अज्ञात