Monday, May 28, 2018

तन्हाई तेरी यादों की

तन्हाई तेरी यादों की ऐसी छलनी लाती है
देह की माँसलता, आँखें, लब इक इक शय छन जाती है

मेरे दिल के अन्दर अब भी बारिश शोर मचाती है
बाहर देखो जून की गर्मी कितनी आग लगाती है

सर्दी की रातों की बारिश में भी ठंढ नहीं लगती
तुमसे मिलकर अब समझे हम धूप कहाँ रुक जाती है

दूर बहुत परदेस है मेरे दिल का कलेवा कर जाना
सुनते हैं रस्ते में ज़ियादा ही कुछ भूख सताती है

भीड़ बहुत बढती जाती है लेकिन मुझको बतलाओ
एक जगह दिल के कोने में क्यूँ खाली रह जाती है

सांवली नंगी बांह पे बालों के छोटे छोटे रेशे
अंगड़ाई लेते हो तो हर सीवान शोर मचाती है

उस सीने के दो चांदों से जब भी आँचल ढल जाए
आधे चाँद की गोरी बारिश कैसी गोट लगाती है

शह्र का इक इक पर्दा यारो तेज़ हवा में उड़ने लगा
भीगी भीगी छांव कोई उस खिड़की पर मंडराती है

आँखों की कुइयां में शायद अब पानी की बूँद नहीं
बोझल साँसों की हर रस्सी खाली खाली आती है

-शबाब मेरठी

Saturday, May 26, 2018

ये अलग बात है

चाहता हूँ उन्हें ये अलग बात है
वो मिलें ना मिलें ये अलग बात है
एक अहसास से दिल महकने लगा
गुल खिलें ना खिलें ये अलग बात है

एक-दूजे से हम यूँ ही मिलते रहें
ज़िन्दगी भर का नाता बने ना बने
हम समर्पण के सद्भाव से पूर्ण हों
हम में कोई प्रदाता बने न बने
दिल की बातें दिलों तक पहुँचती रहें
लब हिलें ना हिलें ये अलग बात है

उनकी बातों में समिधा की पावन महक
मुस्कुराहट में है यक्ष का अवतरण
ऑंख में झिलमिलाती है दीपक की लौ
अश्रु हैं जैसे पंचामृती आचमन
मेरी श्रध्दा नमन उनको करती रहे
वर मिलें ना मिलें ये अलग बात है

-चिराग़ जैन