Sunday, April 19, 2020

शेर-ओ-शायरी Sher-o-shayari

अपनी तन्हाई भी कुछ कम ना थी मसरूफ़ 'वसीम' 
इस.लिए छोड़ दिया अंजुमन आराई को! 

-वसीम बरेलवी 
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मैं हूँ दिल है तन्हाई है
तुम भी होते अच्छा होता! 

-फ़िराक़ गोरखपुरी
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दर ओ दीवार पे शक्लें सी बनाने आई
फिर ये बारिश मेरी तन्हाई चुराने आई! 

-कैफ़ भोपाली
दो रोज़ की महफ़िल है इक उम्र की तन्हाई! 

-सूफ़ी तबस्सुम
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भीड़ से कट के न बैठा करो तन्हाई में
बेख़्याली में कई शहर उजड़ जाते हैं! 

-निदा फ़ाज़ली
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कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है
ज़िन्दगी एक नज़्म लगती है

बज़्मे-याराँ में रहता हूँ तन्हा
और तन्हाई बज़्म लगती है

-गुलज़ार
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निकला करो ये शम्अ लिए घर से भी बाहर
तन्हाई सजाने को मुसीबत नहीं मिलती! 

-निदा फ़ाज़ली
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