Saturday, May 9, 2020

संबन्धों की परिभाषा-

लोग बांधना चाहते हैं सम्बन्धों को परिभाषा में
कैसे व्यक्त करूँ मैं मन की अनुभूति को भाषा में
क्या बतलाऊँ मीरा संग मुरारी का क्या नाता है
शबरी के आंगन से अवध बिहारी का क्या नाता है
क्यों धरती के तपने पर अम्बर बादल बन झरता है
क्यों दीपक का तेल स्वयं बाती के बदले जरता है
क्यों प्यासा रहता चातक पावस-जल की अभिलाषा में
कैसे व्यक्त करूँ मैं मन की अनुभूति को भाषा में
क्या ये थोथे शब्द सुमन की गन्ध बयाँ कर सकते हैं
क्या वीणा और सरगम का अनुबन्ध बयाँ कर सकते हैं
क्यों बौछारों से पहले मौसम पर धुरवा छाती है
क्यों कोयल का स्वर सुन आमों में मिसरी घुल जाती है
कल-कल-कल-कल बहती सरिता किस पावन जिज्ञासा में
कैसे व्यक्त करूँ मैं मन की अनुभूति को भाषा में

-- चिराग़ जैन

ये अलग बात है- चिराग़ जैन

चाहता हूँ उन्हें ये अलग बात है
वो मिलें ना मिलें ये अलग बात है
एक अहसास से दिल महकने लगा
गुल खिलें ना खिलें ये अलग बात है
एक-दूजे से हम यूँ ही मिलते रहें
ज़िन्दगी भर का नाता बने ना बने
हम समर्पण के सद्भाव से पूर्ण हों
हम में कोई प्रदाता बने न बने
दिल की बातें दिलों तक पहुँचती रहें
लब हिलें ना हिलें ये अलग बात है
उनकी बातों में समिधा की पावन महक
मुस्कुराहट में है यक्ष का अवतरण
ऑंख में झिलमिलाती है दीपक की लौ
अश्रु हैं जैसे पंचामृती आचमन
मेरी श्रध्दा नमन उनको करती रहे
वर मिलें ना मिलें ये अलग बात है

--चिराग़ जैन