Friday, May 24, 2013

शेरो शायरी

करो फिर से कोई वादा कभी न फिर बिछड़ने का ! 
तुम्हें क्या फर्क पड़ता है चलो फिर से मुकर जाना !!!
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बेताब से रहते हैं तेरी याद में अक्सर,
शब् भर नहीं सोते तेरी याद में अक्सर!
बेदर्द जमाने का बहाना सा बना के,
हम टूट के रोते हैं तेरी याद में अक्सर!!!

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