Sunday, October 27, 2013

तेरी यादें !

तेरी यादें अब तलक, साथ मेरे है!
तू नहीं तो क्या हुआ, ये पास मेरे है!

Friday, October 4, 2013

प्यार के गमले में क्यों?

प्यार के गमले में क्यों,
नफरत का बीज बो दिया,

नफरत के पौधे को क्यों,
सींच रहे हो धर्म से,
पनपा रहे क्यों इसे,
अपने बुरे कर्म से,

जाती के बल उसे,
और ऊपर चढाओ,
हिंसा के बल पर उसे,
और ना आगे बढ़ाओ,
बस-
और न डालो इस पर,
भ्रष्ट्राचार का जल,
कही प्यार का गमलान जाये गल,
सूरज कही हमेशा के लिए न जाये ढल,
इस से तो अच्छा है इसे उखाड़ फेंको,
और कही प्यार और अमन का पौधा देखो !!!