देह तो आत्मा तक जाने के लिए सुरंग है ।
रास्ता है ।
तुम्हारी उंगलियाँ जैसे कविता की
गतिशील पंक्तियाँ हैं ।
तुम्हारी आँखें कविता की गम्भीर
किन्तु कोमल कल्पना है
तुम्हारा चेहरा
जैसे कविता की
ज़मीन है
तुम एक सुन्दर और सार्थक
कविता हो मेरे लिए।
-सुदामा पांडेय धूमिल
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