Saturday, December 21, 2019

गुरु महिमा- डॉ०ऋचा त्रिपाठी

गुरु में समाहित सभी प्रकाश पुंज,
गुरु के आलोक से आलोकित धरा।
समस्त लोकों की शुभता होती गुरु से,
गुरु से ही सब कुछ, ये सम्बन्ध प्यारा।
गुरु से ले शिक्षा ,पायी जग में सफलता,
गुरु ही मुक्तिपथ का उद्घाटन भी करता।
माता ही प्रथम गुरु ये सबने है माना,
उससे ही शिक्षा पाई, सबको है जाना।
हर एक ज्ञान हेतु गुरु पर ही आश्रित,
उसकी ही कृपा से नहीं हम पराश्रित।
शिक्षा देकर जगत में उन्नति कराता,
दीक्षा देकर हमारे विकारों को हरता।
अबोध से स्वबोध तक उसकी कृपा है,
आत्मानुभूति से आनन्दअनुभूति तक दया है।
गुरु के ही कारण अस्तित्व अपना,
उसी से प्रकाशित ये जीवन हमारा।
अवतारों ने भी गुरु शक्ति को माना,
अत: राम व कृष्ण ने गुरु आज्ञा को माना।
गुरु के ही कारण हम गुण का खजाना,
गुरु पे न्योछावर अब ये जीवन हमारा।


- डॉ०ऋचा त्रिपाठी (बैंगलोर कर्नाटक) 

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