Monday, September 28, 2020

लता मंगेशकर- आनंद बख्शी

 

ये गुलशन में बाद--सबा गा रही है

के पर्वत पे काली घटा गा रही है

ये झरनों ने पैदा किया है तरन्नुम

कि नदियां कोई गीत सा गा रही हैं

ये माहिवाल को याद करती हैसोहनी

कि मीरा भजन श्याम का गा रही हैं

मुझे जानें क्या क्या गुमां हो रहे हैं

नहीं और कोई लता गा रही हैं

यूं ही काश गाती रहें ये हमेशा

दुआ आज खुद ये दुआ गा रही है

 

ये कविता गीतकार आनंद बख्शी ने 1973 में लिखी थी लेकिन उन्होंने लता को ये कविता 2001 में भेंट की, जब लता मंगेशकर को पद्म विभूषण से नवाज़ा गया था।

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