बेचैनी की रात,प्रात भी नहीं सुहाता;घिरी घटा घनघोर,न कोई पंछी गाता;तन भारी, मन खिन्न,जागता दर्द पुराना;सब अपने में मस्त,पराया कष्ट न जाना;कह कैदी कविराय,बुरे दिन आने वाले;रह लेंगे जैसा,रखेगा ऊपर वाले!
---अटल बिहारी वाजपेयी
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